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महराजगंज जनपद का अद्वितीय भगवान जगन्नाथ मंदिर

उत्तर प्रदेश के महराजगंज जनपद में नारायणी नहर के दाहिने किनारे स्थित बड़हरा महंत गांव में स्थित एक अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है – भगवान जगन्नाथ का मंदिर। यह मंदिर सन् 234 पूर्व स्थापित हुआ था और आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है।

महत्वपूर्ण घटना

इस मंदिर के महत्व के बारे में कहा जाता है कि 1786 में महात्मा रामानुजदास अपने शिष्यों के साथ उड़ीसा के जगन्नाथपुरी से मुक्ति नारायण नेपाल की यात्रा कर रहे थे। मध्य रात्रि में उन्हें एक स्वप्न आया जिसमें कलियुग के प्रमुख देवता और भगवान विष्णु के अवतार भगवान जगन्नाथ ने निस्वार्थ भाव से कहा, “मैं यहां निवास करना चाहता हूँ, आप इस स्थान पर मंदिर स्थापित करें।”

मंदिर की स्थापना और विकास

स्वप्न में भगवान के दर्शन के बाद महात्मा रामानुज दास यहां तपस्या में लीन हो गए। निचलौल के राजा महादत्त सेन को इसकी जानकारी मिली और तब उन्होंने महात्मा रामानुज दास के दर्शन किये। उनके स्वप्न की बात सुनकर राजा ने तत्कालीन रूप से मंदिर की स्थापना के लिए आदेश दिया। इसके बाद मंदिर की नींव रखी गई और नियमित रूप से पूजा की जाने लगी।

धार्मिक पर्व और त्योहार

बड़हरा महंत गांव के भगवान जगन्नाथ मंदिर में विभिन्न धार्मिक त्योहार और पर्व मनाए जाते हैं। इनमें श्री रामनवमी, चंदन यात्रा, स्नान यात्रा, भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा, झूलोत्सव, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, विजयादशमी आदि सम्मिलित हैं। प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को प्रवचन और कीर्तन का आयोजन होता है, जो उत्तर प्रदेश के इस क्षेत्र में आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

पावित्र कुआं और उसका महत्व

इस मंदिर के समीप ही एक प्राचीन कुआँ भी स्थित है, जिसका पानी न केवल पीया जाता है, बल्कि स्नान और भोजन की व्यवस्था भी इसी कुएं के पानी से होती है। इस कुएं का पानी पीने से भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त होने की मान्यता है।

निष्कर्ष

बड़हरा महंत गांव में स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर उत्तर प्रदेश के धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके अद्वितीय महत्व, ऐतिहासिक महत्वपूर्ण घटना, और धार्मिक पर्व और त्योहार इसे एक आकर्षक स्थल बनाते हैं, जो लोगों की आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. क्या इस मंदिर में विशेष पूजाअर्चना की जाती है?

जी हां, इस मंदिर में प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को पूजा और कीर्तन का आयोजन होता है जो श्रद्धालुओं की आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

2. क्या इस मंदिर में वार्षिक त्योहार मनाए जाते हैं?

जी हां, इस मंदिर में श्री रामनवमी, चंदन यात्रा, स्नान यात्रा, रथ यात्रा, झूलोत्सव, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, विजयादशमी आदि वार्षिक त्योहार मनाए जाते हैं।

3. क्या पावित्र कुएं का पानी पीने से आशीर्वाद मिलता है?

हां, ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर के पास स्थित पावित्र कुएं का पानी पीने से भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

4. क्या इस मंदिर का इतिहास महात्मा रामानुजदास के साथ जुड़ा है?

जी हां, महात्मा रामानुजदास और भगवान जगन्नाथ के साथ जुड़े उनके स्वप्न के आधार पर इस मंदिर का निर्माण हुआ था।

5. क्या यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है?

हां, यह मंदिर इसके अद्वितीय महत्व, ऐतिहासिक महत्वपूर्ण घटना, और धार्मिक पर्व और त्योहार के कारण प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है।

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