उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में 3298.84 एमएलडी के 104 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए

प्रदूषण के प्रभावी उपशमन, संरक्षण और नदी के कायाकल्प के उद्देश्य को पूरा करते हुए, राज्य में गंगा सहित प्रमुख नदियों में पानी की गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ है। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में 3298.84 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) के 104 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित किए हैं।
इस पहल से नदियों की धाराएं निर्विघ्न और शुद्ध हो गई हैं। नदियों में गिरने वाले नालों को बंद कर दिया गया है। नमानी गंगे के तहत गंगा ही नहीं बल्कि गोमती, सरयू, यमुना, राप्ती समेत सभी प्रमुख नदियों की स्थिति में सघन स्वच्छता अभियान से सुधार हुआ है।
गंदगी की मात्रा कम होने से जलीय जीवों को जीवन मिला है। साथ ही गंद हटाने से नदियों की सतह की सफाई भी संभव हुई है।
नदियों को साफ करने और उनमें सीवेज गिरने से रोकने के साथ-साथ शहरों में घरेलू सीवरेज कनेक्शन देने का भी प्रयास किया जा रहा है। शहरों में सड़कों पर बह रहा गंदा सीवेज का पानी अब नजर नहीं आता।
इससे प्रदूषित पानी के कारण होने वाली कई बीमारियों को नियंत्रित करने में भी मदद मिली है। 3298.84 एमएलडी के 104 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के निर्माण ने इसमें निर्णायक भूमिका निभाई है।
नमामि गंगा के तहत गंगा नदी से सटे अनूपशहर को मुहैया कराए गए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और सीवरेज लाइन ने नदी में दूषित पानी का गिरना बंद कर दिया। यहां 78 करोड़ रुपये की लागत से सीवरेज लाइन बिछाने का काम किया गया।
इसी तर्ज पर सतह पर जमा हुई गाद को हटाने के लिए लखनऊ की गोमती नदी में ड्रेजिंग की गई। नदी में जीएच नहर (हैदर नहर) के सीवर के पानी के उपचार के लिए 120 एमएलडी क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जा रहा है।
इतना ही नहीं गाजियाबाद, मेरठ, आगरा, लोनी, सहारनपुर, बिजनौर, पिलखुआ, मुजफ्फरनगर, रामपुर, गोरखपुर, सुल्तानपुर शहरों से होकर गुजरने वाली नदियों में गिरने वाले सीवेज को रोकने के लिए योजना के तहत एसटीपी का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है।
इसके साथ ही सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के रखरखाव और सुचारू संचालन की भी व्यवस्था की गई है। सरकार की मंशा नदियों को गंदगी और सीवेज से पूरी तरह मुक्त करने की है।
कानपुर में सीसामऊ नाला पूरी तरह बंद
सरकार ने नमामि गंगे योजना के तहत सीसामऊ नाला परियोजना के माध्यम से नाले को पूरी तरह से बंद कर एसटीपी में डालने का काम किया है।  कानपुर में 128 साल पुराना सीसामऊ नाला गंगा नदी के दूषित होने का एक प्रमुख कारण हुआ करता था।
इस नाले से लगभग 140 एमएलडी सीवेज का आई एंड डी द्वारा दोहन किया जा रहा है और 80 एमएलडी बिंगवां एसटीपी और 60 एमएलडी जाजमऊ एसटीपी के साथ इलाज किया जा रहा है। इस प्रणाली के माध्यम से कानपुर की गंगा नदी में प्रदूषण कम हुआ जिससे पानी की गुणवत्ता में सुधार हुआ।
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