मनोरंजनकवितायें और कहानियाँ

उतर गया वो बुखार , ‘जिसका ख़ुमार आज भी है, 

उतर गया वो बुखार ,

जिसका ख़ुमार

                                                          आज भी है,

दिलो को मिला न

वो मुकाम 

जिसका इंतज़ार 

आज भी है, 

मैं छूता न था वो गिलास ऐ जाम का  

लेकिन तेरे नाम का नशा

जाने क्यों उमड़ रहा 

आज भी है, 

शांत सा है मन और ये बदन ,

स्थिर ऐ सागर सा 

लेकिन लहरों के चटानों में टकराने के निशान  

आज भी है।

Poet Mohit Singh Negi

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