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जंहा मछली की आँख अर्जुन ने फोड़ी , फिर उस शहर को किसने जलाया ?

गुड़गांव, जिसे गुरुग्राम के नाम से भी जाना जाता है, सात साल पहले जिसे खाली और सूना जगह थी, आज उस जगह को देखकर कोई विस्मित हो जाएगा। यह खूबसूरत साइबर सिटी उभरते भारत की एक उदाहरण रही है, लेकिन हाल ही में हुए हिंसक घटनाओं ने इस शहर की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।

गुड़गांव का ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:

कई लोगों को इस बात का पता नहीं है कि गुड़गांव का इतिहास महाभारत के काल से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि धर्मराज युधिष्ठिर ने यह नगरी अपने गुरु द्रोणाचार्य को उपहार के तौर पर दी थी, जिसके कारण इसका नाम गुरुग्राम रखा गया था। यह जगह गुरु द्रोणाचार्य के शिक्षा देने की जगह के रूप में भी प्रसिद्ध है। इससे भी नहीं, यहां गुरु द्रोण के भक्त एकलव्य का भी गहरा संबंध है। गुड़गांव वह जगह है जहां अर्जुन ने चिड़िया की आंख में निशाना लगाया था। महाभारत ही नहीं, कई राजवंशों से भी इसका संबंध रहा है। यदुवंशी, राजपूत , मुगल और मराठों ने यहां शासन किया। 1803 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने इसे अपने नियंत्रण में लिया था और ब्रिटिश शासन के दौरान इसका नाम बदलकर गुड़गांव कर दिया गया था। 1858 में यह पंजाब प्रांत का हिस्सा बन गया और 1979 में पांच तहसीलों को जोड़कर आधुनिक गुड़गांव जिला बनाया गया। फिर 2016 में हरियाणा सरकार ने फिर से इसका नाम बदलकर गुरुग्राम कर दिया।

केपी सिंह की दृष्टि और गुड़गांव का परिवर्तन:

वर्ष 1970 के आखिरी दशक की बात है। इस समय डीएलएफ (दिल्ली लैंड एवं फाइनेंस) के मालिक केपी सिंह ने गुड़गांव के भविष्य को समझ लिया था। वे समझ गए थे कि यह शहर विकास और प्रगति का एक केंद्र बन सकता है। केपी सिंह ने बड़े साहस से खाली खेतों को विश्वस्तरीय शहर में बदलने में निवेश किया। उन्होंने कंपनियों को उत्तेजित किया कि वे गुड़गांव में अपना पहला बीपीओ केंद्र स्थापित करें, जिससे और भी कंपनियां शहर में निवेश करने लगी। केपी सिंह के अथक प्रयास और भविष्य की समझ ने गुड़गांव को आज के रूप में तब्दील कर दिया।

गुड़गांव – व्यापारिक केंद्र:

आजकल, गुड़गांव में गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, नेस्ले, अमेरिकन एक्सप्रेस, ताता, हीरो, आईबीएम, और ब्रिटिश एयरवेज जैसी कई बड़ी अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों के कार्यालय स्थित हैं। यह सोहना, मानेसर, और रेवड़ी में व्यापार केंद्रों का भी घर है। हर दिन हजारों नौकरी चाहने वाले यहां आते हैं, जिससे सरकार के लिए यह एक महत्वपूर्ण आय का स्रोत बन गया है। यह शहर इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास स्थित होने और दिल्ली से जुड़े होने के कारण इसका विकास हुआ है।

अभी हुए हिंसक वारदातों का असर गुड़गांव की अर्थव्यवस्था पर:

हालांकि, हाल ही में गुड़गांव के कई हिस्सों में हुई हिंसक वारदातें ने इसकी अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव डाला है। युद्धाभ्यासों के कारण कार्यालयों, कारखानों, कंपनियों, स्कूलों और कॉलेजों को बंद करना पड़ा है, जिससे शहर का चलन फिर से रुक गया है। इस शहर के राजस्व उत्पन्न करने में सरकार को भारी नुकसान हो रहा है।

गुड़गांव के यात्रा सिर्फ एक खाली जमीन से लेकर एक आधुनिक साइबर सिटी बनने तक केपी सिंह जैसे दृढ़ संकल्पी व्यक्ति के संघर्ष और सपनों ने संभाला है। उनके दृष्टि को समझकर वे इस शहर को वैश्विक व्यापार का केंद्र बना दिया। लेकिन हाल ही की हिंसा ने गुड़गांव की प्रगति और समृद्धि पर बड़ी चुनौती रखी है। इसके विकास और सफलता की कहानी भारतीय इतिहास में एक प्रेरणादायक अध्याय होगी, जो युगों तक लोगों को प्रेरित करता रहेगा।

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