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दिल IPS को किसने अकेला छोड़ा, तक़दीर ने , हालत ने या ईमानदारी ने, किसने ?

पिछले 8 साल में 15 जिलों की कमान संभाल चुके प्रभाकर चौधरी का 18 बार तबादला हुआ। प्रभाकर चौधरी 2010 बैच के आईपीएस अफसर हैं. वह मूलत अंबेडकरनगर के रहने वाले हैं. बेसिक ट्रेनिंग खत्म करने के बाद प्रभाकर चौधरी ने बतौर अंडरट्रेनिंग एएसपी नोएडा में जॉइन किया । प्रभाकर चौधरी के 8 साल की कप्तानी के करियर में उनके 18 तबादले हुए. जिसमें बंगले के अवैध कब्जे का मामला हो, या सोनभद्र का उम्भा कांड हो, सीतापुर में वकीलों का उपद्रव हो, या मथुरा में स्थानीय नेता से गतिरोध या फिर अब बरेली में कावड़ियों के उपद्रव को रोकने की कोशिश, प्रभाकर चौधरी ने हमेशा जिले की कानून व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया। प्रभाकर चौधरी वाराणसी में सबसे सफल और प्रिय कप्तान रहे । प्रभाकर चौधरी काशी की तंग गलियों में साइकिल से निकलकर लोगों के बीच चाय पीते और लोगों का फीडबैक लेते. यही वजह है कि प्रभाकर चौधरी वाराणसी.वाराणसी में महज 8 महीने के अंदर बेहद लोकप्रिय कप्तान हो गए थे।
 
प्रभाकर चौधरी,अपराधी हो या.फिर कोई बड़ा नेता वह जीरो टॉलरेंस पर काम करने और त्वरित कार्रवाई करने वाले, जनता को पहले सुनने वाले , अच्छा काम करने वाले पुलिसकर्मियों की हौसला अफजाई और पुलिस के साथ बदसुलूकी करने वालों को कानून की ताकत का एहसास कराने वाले अधिकारियों में गिने जाते हैं। प्रभाकर चौधरी NSG कमांडो की ट्रेनिंग भी कर चुके हैं। प्रभाकर चौधरी.जब सपा सरकार थी तब वह, अक्टूबर 2016 में कानपुर देहात का एसपी बनाया तो वह स्टूडेंट की तरह एक पिट्ठू बैग लेकर जॉइन करने पहुंचे गए थे। जब कानपुर देहात में ट्रेन हादसा हुआ था तब प्रभाकर चौधरी खुद ही हाई मास्क लाइट लगाने पोल खड़ा कराने लगे थे. एंबुलेंस के नहीं पहुंचने पर अपनी गाड़ी से कई घायलों को अस्पताल भेजा. रातभर राहत कार्य की खुद मॉनिटरिंग करते रहे।
 
एक बार वह फरियादी की तरह थाने में पहुंचकर साइकिल चोरी की एफआईआर लिखाने की कोशिश की। कोई भी पुलिसकर्मी उन्हें पहचान ही नहीं पाया। प्रभाकर चौधरी, मुरादाबाद सिर्फ 9 महीने ही कप्तान रहे और 14 जून 2021 को मुरादाबाद से हटाकर उन्हें मेरठ का एसएसपी बनाया गया। मेरठ एक अकेला जिला है जहां पर प्रभाकर चौधरी 1 साल तक एसएसपी रहे. रविवार को बरेली में गैर-पारंपरिक रास्ते से कांवड़ यात्रा निकलने को लेकर शुरू हुए विवाद में उपद्रव बढ़ा और कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने लगी तो एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने हालात संभालने के लिए कांवड़ियों पर लाठी चार्ज करवा दिया और महज आधा घंटे में बरेली शहर की कानून व्यवस्था को बहाल कर दिया. लेकिन 4 घंटे बाद ही प्रभाकर चौधरी के लिए ट्रांसफर आ गया उसके बाद उन्हें एएसपी के पद पर ही आगरा, जौनपुर और फिर वाराणसी भेजा गया. कानपुर नगर के एसपी सिटी तक रहे.जिले में कमान संभालने की बारी आई तो प्रभाकर चौधरी की पहली पोस्टिंग यूपी के आखिरी छोर पर बसे जिले ललितपुर से हुई.
 
जनवरी 2015 में आईपीएस अधिकारी को ललितपुर से हटाने के बाद प्रभाकर चौधरी इंटेलिजेंस मुख्यालय में पोस्ट कर दिए गए. 13 जनवरी 2016 को यूपी के सबसे चर्चित जिला देवरिया का कप्तान बना. जहां उनकी तनाती 18 अगस्त 2016 तक रही. देवरिया के बाद प्रभाकर चौधरी को सीधे बलिया का कप्तान बनाया गय। बलिया के बाद इस आईपीएस अफसर को कानपुर देहात का कप्तान बनाया गय। जब भाजपा सत्ता में आई तो 28 अप्रैल 2017 को प्रभाकर चौधरी का कानपुर देहात से महज 5 महीने में तबादला कर दिया गया और एटीएस भेज दिया गया।
 
प्रभाकर चौधरी 23 सितंबर 2017 तक यूपी एटीएस में तैनात. उसके बाद उनको , 24 सितंबर 2017 को बिजनौर जिले का कप्तान बनाया गया. बिजनौर में भी 6 महीने पूरे नहीं कर पाए और 19 मार्च 2017 को उन्हें हटा दिया गया बिजनौर के बाद वह मथुरा जैसे बड़े जिले का कप्तान बनाया गया. मथुरा में कई पुरानी लूट की घटनाओं का खुलासा हुआ, बड़े चांदी व्यापारियों के अवैध धंधों पर नकेल कसी. अपराधियों के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति का चर्चा पालन करने वाले प्रभाकर चौधरी की मथुरा के स्थानीय नेताओं से नहीं बनी और उनका 3 महीने में ही तबादला कर दिया गया। मथुरा से वह सीतापुर गए। लेकिन वहां भी 6 महीने पूरा होने से पहले ही 8 दिसंबर 2018 को ट्रांसफर कर दिया गया। प्रभाकर चौधरी के कार्यकाल में . सीतापुर में एक मामूली विवाद में थाने में घुसकर वकीलों ने उपद्रव मचाया था. पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की गई तो सीतापुर के बार अध्यक्ष के ऊपर लूट का केस लिखवाकर जेल भेजा गया था. सीतापुर के बाद प्रभाकर चौधरी को बुलंदशहर भेजा गया. 9 दिसंबर 2018 को बुलंदशहर के एसएसपी बने लेकिन वहां से भी 2 महीने बाद 20 फरवरी 2019 को उन्हें हटा दिया गया और एसपी जीआरपी झांसी बनाया गया.प्रभाकर चौधरी जीआरपी में थे कि तभी सोनभद्र में उंभा कांड हो गया. जमीन कब्जे के पुराने विवाद में पुलिस और पब्लिक के बीच पथराव हुआ और फायरिंग हो गई. कानून व्यवस्था बिगड़ने लगी तो सरकार ने आनन-फानन में प्रभाकर चौधरी को 4 अगस्त 2019 के दिन सोनभद्र का कप्तान बनाया. लेकिन 2 महीने बाद 31 अक्टूबर 2019 को सोनभद्र से हटाकर प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी का एसएसपी बनाया गया.
 
7 जुलाई 2020 तक वाराणसी में कप्तान प्रभाकर चौधरी को मुरादाबाद का कप्तान बनाया गया. मेरठ का एसएसपी बनाकर भेज दिया.  25 जून 2022 तक मेरठ के एसपी रहे प्रभाकर चौधरी को आगरा जैसे बड़े शहर के कमान दी गई. लेकिन आगरा में भी वह 5 महीने तक ही टिक पाए और 28 नवंबर 2022 को हटा दिए गए.आगरा से हटकर पीएसी सीतापुर भेजा गया और 12 मार्च 2023 को प्रभाकर चौधरी को बरेली का नया एसएसपी बनाया गया, लेकिन बरेली में भी प्रभाकर चौधरी 4 महीने तक ही रह पाए और 30 जुलाई 2023 को बरेली एसएसपी से भी हटाकर 32वीं वाहिनी लखनऊ का सेनानायक बना दिया गया. ट्रेनिंग के कार्यकाल को हटा दें तो जनवरी 2015 से जुलाई 2023। प्रभाकर चौधरी का सीबीआई में डेपुटेशन में जाना तय है. सीबीआई के तरफ से 4 बार रिलीव करने का रिमाइंडर दिया जा चुका है लेकिन सरकार ने रिलीव नहीं किया।

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