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हम ,भारत का स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को क्यों मानते है?

हम ,भारत का स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को मानते है जबकि वायसराय माउंटबेटनपता ने भारत की आज़ादी १४ अगस्त को कर दी थी फिर हम एक दिन क्यों आगे बढे । और आधी रात ही क्यों आज़ाद हुए, दिन में क्यों नहीं हुए , क्या था कारण? क्योकि नक्षत्रो के अनुसार 14 अगस्त और दिन में आज़ादी के लिए उपयुक्त नहीं था , रात १२ बजे उपयुक्त थी यही वजह थी भारत १५ अगस्त कि रात आज़ाद हुआ। और पाकिस्तान १४ अगस्त को जिसको आज देखा जाये या तुलना कि जाये आज भारत कहाँ खड़ा है और पाकिस्तान कहाँ खड़ा है क्योकि पाकिस्तान, 14 अगस्त को आज़ादी मनाता है।

डॉमिनिक लैपियर और लैरी कॉलिंस की पुस्तक फ्रीडम एट मिडनाइट, के अनुसार , देश आज़ाद होते ही ज्यादातर महात्मा गाँधी के शिष्य उनसे अलग होने लगे थे उनको यह महसूस होने लगा था कि महात्मा जी की बातें अवैज्ञानिक और देहाती हैं वह भारत को भविष्योन्मुखी बनाने की अपेक्षा अतीत पर सम्मोहन की स्थिति में डाल रही हैं। वह नेतागण चरखे को भारतीय देहात का जागरण चिह्न न मानकर, उसे ‘गांधी जी का खिलौना’ कहने लगे थे। गांधी जी के एतराज की उपेक्षा करके उन्होंने भारत के राष्ट्रीय झण्डे के मध्य से चरखे को हटा दिया था। सम्राट अशोक के युगल सिहों के बीच फंसे धर्म चक्र को राष्ट्रीय झण्डे के बीच जगह दी थी, ताकि अशोक जिस शक्ति और आधिपत्य का स्वामी था, उसकी संकेत किरणें राष्ट्रीय झण्डे से फूट सकें।’

आगे कहा गया है, ‘गांधी शक्ति और आधिपत्य के प्रचारक नहीं थे। उनके अनुसार, ये दोनों तत्व मनुष्य को हिंसा और पतन की ओर ले जाते हैं। वह तो आत्म जागरण और त्याग के प्रचारक थे। गाँधी जी ने कहा था (उक्त पुस्तक के अनुसार )भारतीय राष्ट्रीय झण्डा देखने में चाहे कितना ही कलात्मक क्यों न लगता हो; उसमें हिंसा का जो सन्देश छिपा है, उसके आगे मैं नतमस्तक कैसे होऊंगा? यही वजह रही कि पोषित नेताओं और उनके बीच मतभेदों की शुरुआत हुई । गाँधी जी और उनके पोषित नेता कभी भी बड़ी सजा या फांसी जैसी सजा नहीं पा पाए वल्कि उनके जो जेल मिली उसमें हेल्पर के अलाबा २ कमरे टॉयलेट आदि अटैच्ड थे साथ ही लिखने पड़ने कि सुविधा थी और दूसरे क्रांतकारी जैसे माननीय लाला लाजपतराय, लाठी चार्ज में मारे गए, शैतान सिंह और उनके १०० साथी को एक साथ एक पेड़ पर फांसी के तौर लटका दिया गया। घाघरा गैंग कि कप्तान शीला देवी अंग्रेजो से युद्ध करते हुए उत्तर प्रदेश के बांदा में शहीद हुए । भगत सिंह , राजगुरु, सुखदेव , को फांसी मिली , चंद्र शेखर आज़ाद मुखविर के मुखबिरी करने पर शहीद हो गए , सबसे कम उम्र के शहीद खुदीराम बोस भी फांसी पर लटका दिए गए ,सुभाष चंद्र बॉस को देश से छोड़ना पड़ा और वीर सँवाकर १९ साल तक काळा पानी कि सजा काटे। मगर कुछ क्रांतकारी अंत तक रहे। ऐसा क्यों हुआ यह सोचनीय है।

एक सवाल और कौंधता है , औरंगजेव के समय ९९ प्रतिशत ज़मीन कृषि थी , लोग कम थे ज़मीन ही ज़मीन थी तब ऐसा क्या था कि हर प्रमुख मदिर के बगल में मज़्जिद बनाई गई या है या बनी।

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