अमेरिका ने भारत को कारोबार के लिहाज से विकासशील देशों की सूची से बाहर किया

Medhaj News 13 Feb 20 , 15:36:05 World Viewed : 754 Times
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अमेरिका ने भारत को कारोबार के लिहाज से 'विकासशील देशों' की सूची से बाहर कर दिया है | आइए जानते हैं कि क्या है यह मसला और इसका भारत-अमेरिका कारोबार पर क्या असर पड़ सकता है | अमेरिका के व्यापार प्रतिनिध‍ि (USTR) ने  इस हफ्ते सोमवार को विकासशील देशों की सूची से भारत को बाहर कर दिया है | इसका मतलब यह है कि भारत अब उन खास देशों में नहीं रहेगा, जिनके निर्यात को इस जांच से छूट मिलती है क‍ि वे अनुचित सब्स‍िडी वाले निर्यात से अमेरिकी उद्योग को नुकसान तो नहीं पहुंचा रहे | इसे काउंटरवलिंग ड्यूटी (CVD) जांच से राहत कहा जाता है | इस सूची से ब्राजील, इंडोनेश‍िया, हांगकांग, दक्ष‍िण अफ्रीका और अर्जेंटीना को भी इस सूची से बाहर कर दिया है | अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह लिस्ट 1998 में बन गई थी और अब अप्रासंगिक हो चुकी है | कई तरह के फायदों वाले इस सूची में सिर्फ विकासशील देशों को रखा जाता है | यानी अमेरिका ने बड़ी चालाकी से भारत के इसमें शामिल होने के रास्ते ही बंद कर दिए हैं | पिछले साल जब अमेरिका ने इस सूची से भारत को बाहर किया था तो भारत ने यह मजबूत तर्क दिया था कि जीएसपी के फायदे सभी विकासशील देशों को बिना किसी लेनदेन की शर्त के साथ मिलने चाहिए और इनका इस्तेमाल अमेरिका अपने व्यापारिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए नहीं कर सकता |





अमेरिका का कहना है कि भारत अब G-20 का सदस्य बन चुका है और दुनिया के व्यापार में इसका हिस्सा 0.5 फीसदी से ज्यादा हो चुका है | यह हाल तब है कि जब भारत अमेरिका से ट्रेड डील करने और उसके तरजीही फायदों वाले जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रीफरेंस (GSP) में फिर से शामिल होने की कोश‍िश कर रहा है | लेकिन अब जीएसपी में शामिल होने की भारत की राह काफी कठिन हो गई है | यूएसटीआर ने कहा - जिन देशों का विश्व व्यापार में 0.5 फीसदी या उससे ज्यादा हिस्सा होता है, उसे हम सीवीडी कानून के हिसाब से विकसित देश की श्रेणी में रखते हैं | गौरतलब है कि साल 2018 में वैश्विक निर्यात में भारत का हिस्सा 1.67 फीसदी था | इसी तरह वैश्विक निर्यात में भारत का हिस्सा 2.57 फीसदी था | इससे अब अमेरिका को होने वाले भारतीय उत्पादों के निर्यात को तरह-तरह की अड़चनों से गुजरना पड़ सकता है | अगर किसी अमेरिकी इंडस्ट्री लॉबी ने यह आरोप लगा दिया कि किसी उत्पाद में भारत सरकार के सब्स‍िडी की वजह से अमेरिकी हितों को चोट पहुंच रही है, तो इसकी जांच शुरू होजाएगी और उस वस्तु का अमेरिका को भारतीय निर्यात ठप हो जाएगा | इस निर्यात पर रोक भी लगाई जा सकती है | यह खासकर कृष‍ि उत्पादों  के लिए नुकसानदेह हो सकता है जिसमें कि उर्वरक, बिजली जैसी कई चीजों पर भारत सरकार सब्सिडी देती है | गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल जून में ही भारत को जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रीफरेंस (GSP) से बाहर कर दिया था | यह अमेरिका का सबसे बड़ा और सबसे पुराना व्यापार तरजीह कार्यक्रम है | इसका लक्ष्य यह है कि कई देशों के हजारों उत्पादों को करमुक्त प्रवेश देकर उन देशों में आर्थ‍िक विकास को बढ़ावा दिया जाए | अमेरिका का कहना था कि इसके बदले उसे भारत अपने बाजार में समान और वाजिब पहुंच नहीं दे रहा है | अमेरिका चाहता था कि भारत अमेरिकी कंपनियों को अपने यहां बराबरी का मौका दे | भारत साल 2017 में GSP प्रोग्राम का सबसे बड़ा लाभार्थी था और तब अमेरिका में 5.7 अरब डॉलर के भारतीय आयात को करमुक्त रखा गया था | अब देखना यह है कि राष्ट्रपति ट्रंप के 24 फरवरी को भारत दौरे पर इस बारे में कोई समझौता होता है या नहीं |


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